लोग पागल हुये फिर रहे हैं

0
9

लोग पागल हुये फिर रहे हैं

तर्ज – इश्क़ में हम तुम्हें…….

लोग पागल हुये फिर रहे हैं,
इन्हें पाखण्ड़ से कैसे बचायें।
वेद का मार्ग, सबसे सही है,
कैसे इनके दिलों में बिठायें ।।
लोग पागल हुये…………

घूम लो गर तुम्हें घूमना है,
पर भटकनें से फायदा नहीं है
वेद वाणी ये, है उस प्रभु की,
आओ सबको “सचिन” समझायें
लोग पागल हुये……….

बालाजी को कोई पूजता है,
कोई शिवजी पे जल को चढ़ाता
कुछ काली के, भक्त बनें हैं,
कुछ पीरों को चादर चढ़ायें
लोग पागल हुये………..

जिसकी शादी का कुछ भी पता ना,
ना ससुर सास देवर ना शोहर
उस कुमारी को, ये नालायक,
संतोषी माता बतायें लोग पागल हुये……..

कुछ है कोल्हू अक्ल के बेचारे,
वो तो जीते गुरू के सहारे
उनका कोई ना, है इस जहाँ में,
उनकी मुक्ति गुरू ही करायें
लोग पागल हुये………

कोई गंगा में गोते लगाता,
काशी मथुरा व हरिद्वार जाता
छोड़के कोई, गंगा के जल को,
आबे-ज़म-ज़म अरब से मंगायें
लोग पागल हुये………