तेरी रचना को देखू भगवन मै।
स्वर :- सपने सुहाने लड़कपन के
तेरी रचना को देखू भगवन मै।
उठे खुशियों की लहरें मेरे मन में।।
कही मोर पपीहा बोले,
कोयलिया मदुरस घोले चित
चोर चकोर वनों में प्रियतम
की बिरह में डोले पक्षियों
की चह चहां कूजन में।।१।।
नागिन सी घिरी लताऐं,
वृक्षों के ले रही फेरे
कही फूल गुलाब चमेली,
भीनी खुशबू को बिखेरे
सूरज मूखी सजी उपवन में ।। २।।
टिम टिम तारे मुस्काते,
चंदा की चले बरात उषा
रानी रोज दुल्हन सी
सजती है नित ही प्रात,
प्रभू ज्योती निहारो कण कण में ।।३।।










