वेद की राहों का परवाना हूं मैं।।

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वेद की राहों का परवाना हूं मैं।।

स्वर :- हां दीवाना हूं मैं

वेद की राहों का परवाना हूं मैं।।
कोई भ्रान्ति नही और
अन्धेरा नही ऐसा पावन
सा कोई सवेरा नहीं।
रब का लेकर के आया
नजराना हूं मैं।। १ ।।

काल के जाल की जहां
निशानी नही जिसमें किस्से
नहीं और कहानी नहीं हर
कसौटी पे परखा पैमाना हूं मैं।। २।।

पन्थ देखे बहुत पर पथ ना
मिला ग्रन्थ देखे बहुत पर
सत ना मिला बुद्धि तर्कों से
सबको ही छाना हू मैं।। ३ ।।

जिनमें हरकत नही और न
ही आत्मा इन बुतो को ही
दुनियां ने माना खुदा नही
झुठा सुरेन्द्र फंसाना हू मैं ।।४।।