जागरे मेरे मन गाले हरि के गुण

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जागरे मेरे मन गाले हरि के गुण

क्या पता ये जीवन रहे ना रहे…. जाग रे….

दाता वृष्टि सुखों की बरसाए

ध्याये वही पाए सच्चिदानन्द…. जाग रे….

जीवन नैया प्रभु तू तारे

माँझी तू मेरा मैं तेरे सहारे… जाग रे..

ज्योति सत्य की प्रभु तुमसे ही पाई

जलती रहे सदा तेरे सहारे…. जाग रे….

आत्मा बने ज्ञानी प्रीत जो प्रभु से जोड़ी

प्रीत लगा के बैठा रहूँ तेरे द्वारे…. जाग रे….

व्याकुल मन तेरी आस लगाए

ध्यान में रहूँ तेरे साँझ सकारे…. जाग रे….

वेदामृत की चाह जगाई

आनन्द रस दे प्रीतम प्यारे…. जाग रे….

तर्ज : आवडे हे रूप गोदी चे सगुण