अगर महर्षि की बातों के ऊपर विश्वास होता।

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अगर महर्षि की बातों के ऊपर विश्वास होता।(धुन- अगर दिल हमारा शीशे के बदले…..

अगर महर्षि की बातों के
ऊपर विश्वास होता।
विश्वास होता तो पाखण्ड न बढ़ते,
न भाई बिछड़ते, न
आपस में लड़ते ना
यूँ नाश होता।। टेक ।।

ऋषि ने कहा था वाणी
वेद की है सारे जहाँ के लिए एकसी।
अगर मान लेते तो आज
यह नहीं टुकड़ो में धरती
और आकाश होता ।।1।।

ऋषि ने कहा ईश निराकार है
अजन्मा अनन्त प्रभु सर्वाधार है।
अगर कह देते कि स्वीकार है
तो आज के अवतारों का
पर्दाफाश होता।।2।।

ऋषि ने तुम्हें बहुत आवाज दी
कि आर्यों सम्भालों सत्ता राज की।
अगर मान लेते तो यह आज की,
मुसीबत न होती न यह त्रास होता।।3।।

ऋषि ने कहा था मानव जाति को,
आर्य और दस्यु दो वर्ग में बाँटो।
अगर मान लेते उस बात को,
‘प्रेमी’ पाखण्डियों का,
ना यह साहस होता।।4।।