क्रोध बोध मे विरोध क्रोध

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क्रोध बोध मे विरोध क्रोध

क्रोध बोध मे विरोध क्रोध
और बोध कभी हो एक नहीं,
जहां क्रोध का डेरा हो वहां
ठहरे बोध विवेक नहीं,
क्रोध से उत्पन्न आठ व्यसन
क्रोधी पर करते है प्रहार,
चुगली करना और द्रोह रखना
तीसरा दोष है बलात्कार,
डुबा देते हैं बीच धार इस में
सम्मति अनेक नही ।।1।।

चौथा दोष ईर्षा करना क्रोधी
को करदे मद होश,
पंचम असुया दोषों मे गुण
और गुणों में देखे दोष,
ईर्षा द्वेष मन आकोश दुर्गुण
दुरितों पर ब्रेक नही।।2।।

छटा दोष अर्थ दूषण बुरे
काम में लगाना धन,
सातवां दोष कटु वचन
बोलना इस से होवे दुषित मन,
सावधान जो सज्जन जन
उन पर दुर्व्यसन अटेक नहीं।।3।।

आठवां दोष है बिन अपराध ही
किसी को भारी दन्ड देना,
या थोड़े अपराध के बदले
उसके प्राण भी ले लेना,
प्रेमी समझाये समझे ना गूढ
विषय प्रत्येक नही।।4।।