पथ पथिक अपना बना ले
पथ पथिक अपना बना ले
मत किसी का आसरा ले,
तेरी भी सत्ता भी अटल है
फिर बता तू क्यों विहृल है।। टेक।।
एक व्यक्ति तो वह है विध्न
बाधाओं के डर से,
कर्म करने के लिये बाहर नहीं
आता है घर से, दूसरा वह है
किसी के कहने सुनने के असर से,
कार्य प्रारम्भ करके लौट जाता है
अधर से, तीसरा है करके
निश्चय कर्म भूमि में हो निर्भय,
प्राप्त कर लेता सकल
हे बस वही राही सफल है।।1।।
उत्तम व्यक्ति तो वह है
अपना कुछ नुकसान करके,
औरो के लाभार्थ प्रसन्न चित्त
कर्त्तव्य जान करके,
मध्यम वह है अपने जैसा
दूसरों को मान करके,
ओर का नुकसान न हो
अपनाकुछ उत्थान करके,
सबकी उन्नति में उन्नति समझे
सर्वोत्तम प्रगति,
श्रेष्ठ है सक्षम सबल है
बस वही राही सफल है।।2।।
मृत्यु और जीवन के अन्तर
का जिसे अनुभव नहीं है,
आप ही बतलाओं क्या
वह चलता फिरताशव नहीं है,
देश जाति धर्म का निज
कर्म का गौरव नहीं है,
और जो चाहो सो कहलो
परन्तु वह मानव नही है,
जिन्दगी में झन्झटों से
पार जाता सकटों से,
इस कला में जो कुशल है
बस वही राही सफल है।।३।।
वीर भोग्या वसुन्धरा यह
भूमि वीरों के लिये है,
सृष्टि का उपभोग समुचित
करने वाला ही जिये है,
आदि सृष्टि से ही जीवन
पद्धति यह भारतीय है,
कर्मवीरो के ही कदमों पै
यह कुल दुनिया निये है,
साफ सुन्दर रास्ते जो
दूसरों के वास्ते जो,
प्रेमी पी लेता गरल है
बस वही राही सफल है।।4।।
अमृत की प्राण रक्षा के
लिये विष पान होता है,
अमर जो देश को करदे
मरण बलिदान होता है,
शहीदों के लहु से चित्र
बनता आज है कलका,
किसी भी सृष्टि से पहले
प्रलय का गान होता है।










