समय है आज यह आपस में मिलकर रहने का।

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समय है आज यह आपस में मिलकर रहने का। (धुन-हमें तो लूट लिया मिल के)

समय है आज यह आपस
में मिलकर रहने का।
समय कुछ करने का,
समय नहीं कहने का।। टेक ।।

खड़ी सरहद पर आज
दुश्मनों की टोली है।
जरा पहचानों तो खतरे
की उनकी बोली है।।

कभी पूरब कभी पश्चिम
दिशा ललकारें हैं।
कभी उत्तर की ओर
से गर्म फुकारें हैं।।

कभी दक्षिण में जड़े
जमती है बवन्डर की।
कभी हालत खराब हो
उठे है अन्दर की।।

लगी है आग उस घर में
जहां तू रहता है।
तभी तो आज जमाना
तुम्हें यह कहता है,
समय है।।1।।

मांगते रोटी जो औरो से
पेट भरने को।
शर्म की बात है नहीं
जगह डुब मरने को।।

बदन के ढ़ापने को बहुतो
पै वस्त्र भी नहीं।
नीले आकाश के नीचे
पड़े है घर भी नहीं।
बदल के ढ़ापने को
वस्त्र पैदा करना है।।
करोड़ो भूखें भाइयों
का पेट भरना है।।

बना के छोटा बड़ा
झोपड़ा भी रहना है।
तभी तो आज जमाने का
तुम्हें कहना ह, समय है। ।2।।

इंच भर भूमि पर भी
आज पैदावार करो।
सब्जियां गमलों में बोकर
के गमले छत पै धरों ।

भीत की जड़ में लगा
दो पपीते और केले।
चढ़ा दो सब्जियों की
रस्सियों ऊपर बेले ।।

बगड़ में डोलियो में
शकरगन्द आलू बो दो।
और फिर टिन्डी भिन्डी
घुईं ये कचालू बो दो ।।

यदि जंगल के खेत में
कमी है पानी की।।
तो यह भी बात नहीं है
कोई हैरानी की।।

उठो कस करके कमर
अब ना तुम अल्सेट करो ।
खोदकर कच्चे कुएं
ढेकुली और रहट करो ।।

जला कर आग में गोबर
न तुम बरबाद करो।
डालकर गड्ढों में गोबर
का बढ़िया खाद करो।
खाद पानी से पैदा होवे
रेत बन्जड़ में।।

लगादो भिस्स और
सिंघाड़ें नाले जोहड़ में ।
समस्या खाद्य की इस
तरह सारी हल होगी।।

हमारी शक्ति फिर
संसार में प्रबल होगी।
यदि स्वावलम्बी जीवन
तुम्हें पसन्द आता है।।

लगे मजदूर आज जो
ये कारखानो में।
विनय उनसे है कभी
लाये ना इमानो में।।

आज व्यापारियों से भी
मुझे कुछ कहना है।
समय नाजुक तुम्हें
भी सावधान रहना है।।

तुम्हारे हाथ में है
भाव न बढ़ते पाये।
किसी भी वस्तु पर
एक पैसा न चढ़ने पाये।।

हमारे शत्रु नही
पाकिस्तान चीन में है।
हमारे शत्रु हमारी
ही आस्तीन में है।।

बिगाड़ा देश का नही
दुश्मन की तलवारो ने।।
बिगाड़ा देश का इस
देश के गद्दारों ने।
खाये खसम का और
गीत गाये भाईयों के।।

काट लो नाक कान
आज ऐसी लुगाईयों के।
देश को दो सबूत
अपनी वफादारी का ।।

शोभाराम है कर्त्तव्य
हर नर नारी का ।
समय है आज यह
आपस में मिलकर रहने का ।।
समय कुछ करने का
समय नहीं कहने का।।4।।

पन्छी कहते हैं गगन बदला है,
बुलबुले कहती कि चमन बदला है,
शमशान की खामोशी मगर कहती है,
है लाश वही सिर्फ कफन बदला है,