जरूरत देश को है आज नौजवानों की।

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जरूरत देश को है आज नौजवानों की। (धुन-हमे तो लूट लिया)

जरूरत देश को है
आज नौजवानों की।
देश दीवानों की वीर
मर्दानों की।। टेक ।।

देश के कार्यों में जो
कभी आलस न करें।
बनाकर लक्ष कभी
यश में अपयश न करें।।

9भरें हो प्यार के उद्‌गार
वैमनस न करें।
रहें सब प्रेम से आपस
में कश मकश न करें।।

ऊंच नीच भेद भाव
को मिटायें जो।
भूले भाइयों को गले
से लगायें जो ।।
जाति एक समझें मुल्क
के इन्सानो की ।।1।।

स्वयं दुख सहन करके
दुख सदा दुखियों का हरें।
बाद में आप खायें पहले
पेट भूखों का भरें।।

करें स्वाभिमान से शुभ
कर्म सदा पापों से डरें।
जियें भी देश के लिए
देश ऊपर ही मरे।।

अपने देश पर संकट
के बादल छायें जहां।
सीने खोल कर बहादुर
चले झट जायें वहां ।।
चढ़ायें देश पर हंस-हंस
के बलि प्राणों की।।2।।

भलाई में जो देश
की बड़ाई समझें ।।
अवैदिक कर्म को
जो सर्वदा बुराई समझें।
पराई नारियों को
बहन और माई समझें ।।

सरल संयमी स्वस्थ
स्वाधीन होवे जो।
हों आदर्श चरित्र वान
अज्ञान खोवें जो ।।
बचें पाखण्ड से बातें
सुने विद्वानो की ।।3।।

चढ़े हैं देश पर घनघोर
आपदाओं के ।
करूण शोर है लालों
के और ललनाओं के ।।

बिगड़े होश है अब
देश के नेताओं के ।
सुनना बन्द घटे तौर
अब निगाहों के।।
पश्चिम में गर्ज रहा बादल
काला काला है।
दक्षिण में देखो क्या
विनाश होने वाला है।।

पूर्व में कुछ विद्रोही
दल फुंकारता है।
उत्तर में चीन युद्ध के
लिए ललकारता है।।

समय है आज आलस
और प्रमाद छोड़कर जो।
बुराईयों से जमाने
की मुंह मोड़कर जो।।
करें पहचान शोभाराम
के व्याख्यानों की।।4।।