जवानों तुम्हें पग बढ़ाना पड़ेगा
जवानों तुम्हें पग बढ़ाना पड़ेगा,
जो कह रहे हो करके
अब दिखाना पड़ेगा। टेक।
मेहनतकश निर्धन के बच्चे
दिन और रात कमाते हैं।
तन से नंगे आंसू पीकर
पेट बांध सो जाते हैं।।
बदन ढ़ांपने को वस्त्र नहीं हैं
सिर छिपाने को छप्पर नहीं हैं।
पृथ्वी बिछौना, आकाश की छत,
जूल्मों सितम क्या उन पर नहीं है।।
मारे मारे फिरे हैं गर्मी सर्दी और बरसात में।
हानी निठल्ले और निकम्मे
भ्रष्टाचार फैलाते हैं।
अपनी स्वार्थ सिद्धि पर
निर्धन की बली चढ़ाते हैं।।
विलासिता के पुतले नाश
की निशानी गरीबों के
दुश्मन बड़े अभिमानी।
देश धर्म से नहीं प्यार
इनको जुल्मो से भरपूर
इनकी कहानी।।
फिर भी सारी सुख सुविधायें
आज इन्हीं के हाथ में।
आज श्रमिक के पेट को
रोटी तन को वस्त्र देना है।
शिक्षा और चिकित्सा में भी
अच्छा अस्तर देना है।।
रहने को घर देना करने
को धंधा उठालो वजन करके
मजबूत कंधा।
दुखिया अनाथों के रक्षक
तुम ही हो तुम्हारे बिना
देश भारत है अंधा ।।
ऊंच नीच का भेद भुलाकर चलो
सभी एक साथ में।
सावधान ए जवान तेरी
धरती कभी रिपु हड़प जावे।
कभी धर्म संस्कृति सम्यता
गंऊ की नस्लें खप जावे ।।
कभी लुट न जावे तेरे लाल ललना,
प्रहरी हैं तू सावधानी से चलना।
भयंकर समय और मार्ग विकट है
बड़ा ही कठिन आज गिरकर
संभलना आज विधर्मी शत्रु
प्रेमी खड़े तुम्हारी घात में ।।4।।










