नींद से देशवासियों बेदार हो जाओ।
नींद से देशवासियों
बेदार हो जाओ।
समय आया है आज
होशियार हो जाओ।।
विधर्मियों का राज
यहां हजारों साल रहा।
फिर भी देश मेरा चलता
अपनी चाल रहा।।
अपने पथ से हमें कोई
भी हटा न सका।
हमारी संस्कृति सभ्यता
मिटा न सका ।।
आज भारतीय रहे हैं
नहीं भारत वाले।
दिल दिमाग सब
अंग्रेजियत में रंग डाले।।
धोखेबाज चापलूस
किसके फ्रेन्ड बने।
पथ से भ्रष्ट हो अंग्रेज
सैकिन्ड हैन्ड बनें।।
अपनी संस्कृति को
दहकानी कहते हैं।
अपने ऋषियों को भी
मिथिकल प्राणी कहते हैं।।
धर्म और ईश्वर को भी
कहें यह धोखा है।
तभी तो कर रहा हूँ
आज अन्तिम मौका है।
नींद से देशवासियों
बेदार हो जाओं ।। 1 ।।
प्यारी संस्कृत विद्या
का ह्रास हुआ।
छलसे विकृत भाषा
इंग्लिश का प्रकाश हुआ।।
एक भाषा वाला देश
बहु भाषी बना।
आलस और प्रमाद में
पड़कर विलासी बना।।
अर्ध नग्न नारियाँ
अंगरेजी बोल करके।
अपनी स्वच्छता का दें
प्रमाण डोल करके ।।
छात्रों में सादगी की
जगह फैशन है।
ब्रह्मचर्य अवस्था में ही
दूषित मन है।।
चल चित्रों अन्दर नग्न
डांस होते है।
छात्र छात्राओं में
रोमांस होते हैं।।
आचार का आदर्श
गिरा जाता है।
परिवारों में कलह का
साम्राज्य पाता हैं।।
नित नव विवाहिता
अनेकों अबलायें।
हो निराश कर रही हैं
आत्म हत्यायें ।।
हुआ झूठा और निर्लज्ज
भ्रष्ठ शासक वर्ग।
है असमर्थ शिक्षा
प्रबन्धक अध्यापक वर्ग।
आज हर जगह उत्कोच
चर्म सीमा पर ।।
धर्म शासन ईश्वर का
रहा है नहीं डर।
अपने देश भेष भाषा
से भी प्यार नहीं।।
तभी तो कर रहा हूँ
यह अच्छे आसार नहीं।










