जिसने राम को बन भिजवाया
जिसने राम को बन भिजवाया,
कृतध्न जितना पापी बताया।
माँ उसे पाप लगे।।
राम को वन भिजवाने का
जिस पापी ने परामर्श दिया।
वेदानुगामी न होने का
उस पामर ने पाप लिया।।
सूर्याभिमुख हो मल मूत्र त्यागे,
गौ को लात मारने से जो लागे।
में उसे पाप लगे।।1।।
पुत्रवत प्रजा पालक राजा
के जो प्रति करे विद्रोह।
राम को वन भिजवाने वाला
उसी पाप का भोगी हो।।
प्रजा की रक्षा नहीं करे
जो जितना पाप लगे राजा को।
मां उसे पाप लगे।।2।।
यज्ञ में ऋत्विजों को दक्षिणा
देने की प्रतिज्ञा कर।
फिर पीछे नहीं पूर्ण करे
जो जितना पाप चढ़े उस पर ।।
रण में पीठ दिखाकर आवें
कायर जितना पाप कमावे।
मां उसे पाप लगे।।3।।
जिसने राम को वन भिजवाया
दुष्ट आत्मा नीच अधम ।
परलोक साधक गुरुद्वारा
उपदिष्ट वह भूले तत्व सूक्ष्म ।।
नित्य कर्म किये बिन जो खावे
जितना वह पापी कहलावे।
मां उसे पाप लगे।।4।।
मद्य पान परस्त्री गमन में
जुए में आसक्त है जो।
कुपात्रों को दान जो दे
जितना पापी कम्बख्त वो।।
जिसने किया यह नीच इरादा
इन सब पापियों से भी ज्यादा।
मां उसे पाप लगे।।5।।
जिसने राम को वन भिजवाया
हृदय ज्ञान चक्षु फूटें।
विधि पूर्वक कमाई हुई
धन सम्पत्ति दस्यु लूटें ।।
गुरू स्त्री गामी और मित्र द्रोही,
पाप के भोगी जितने सोई।।
मां उसे पाप लगे।।6।।
प्रातः सायं दोनों सन्धियों
में है पाप जो सोता है।
स्त्री बालक बृद्ध के वध
करने में पाप जो होता है।।
दस्यु पामर पापी पातक
बना है जो रघुकुल का घातक।
मां उसे पाप लगे।।7।।
विद्वान रक्षक माता पिता
की सेवा का न पुण्य मिले।
सज्जन समाज से बहिष्कृत
हो सत्कर्मों में मन ना चले।।
प्यासे को जल न पिलाने का
सोते हुओं के घर जलाने का।
मां उसे पाप लगे।।8।।
शोभाराम जिसकी सम्मत्ति
से आर्य राम गये वन में ।।
वह बहुत सन्तान वाला हो
दरिद्री हो रहे ज्वर तन में।
कपटप्रिय बेईमान चुगलखोर
जिस हालत में हो
वह जिस ठौर।
मां उसे पाप लगे।।9।।










