न सर झुका के चलो
न सर झुका के चलो,
न सर उठा के चलो।
हृदय में स्वाभिमान
की ज्योति जगाके चलो ।।
अभिमान करना नहीं,
स्वाभिमान खोना नहीं।
बिना बात हंसना नहीं,
मुश्किलों में रोना नहीं ।।
मंजिल पै जाने के लिए,
लक्ष्य को बनाके चलो।।1।।
प्रभु का कार्य,
लेने की ना कुचेष्टा करो।
कभी निज कार्य,
मत औरो के कन्धों पै धरों ।।
कर्त्तव्य पालन ही भक्ति है,
गीत गाके चलो।।2।।
आज कल दुनिया भूली,
भटकी अपनी राहों से।
दिखादो सीधा मार्ग,
लगा करके बाहों से ।।
जीनें दो जीओ के,
अब पाठ को पढ़ा के चलो।। 3 ।।
शौच सन्तोष तप
स्वाध्याय ईश्वर प्रणिधान।
अहिंसा सत्य अस्तेय
ब्रह्मचर्य अपरिग्रह मान।।
यह शोभाराम ‘प्रेमी’ यम
नियम निभा के चलों । ।4।।










