ये क्या हो रहा है (धुन-मेरे दोस्त किस्सा)
ये क्या हो रहा है,
ये क्या कर रहे हो।
चाहते हो जीना मगर मर रहे हो।।
कमाने को आये थे,
जमा खो रहे हो,
सुगम पथ में कांटे
स्वयं बो रहे हो।
उजड़े नगर में बसा घर रहे हो।।1
कर्म करने में पूर्ण स्वतन्त्र हो तुम,
फल भोगने में परतन्त्र हो तुम।
व्यर्थ दोष ओरों पै, क्यों धर रहे हो। ।2।।
पुरूषार्थ का फल प्रारब्ध है यह।
जैसा किया वैसा उपलब्ध है यह।
अपनी ही छाया से डर रहे हो। ।3।।
अविद्या व अस्मिला राग और द्वेषा,
अभिनिवेशा पंच क्लेशा |
प्रेमी दिलो में क्यो भर रहे हो।।4।।










