ओऽम् बोले, अमृत चाखे

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ओऽम् बोले, अमृत चाखे

ओऽम् बोले, अमृत चाखे,
अमृत चखने को तुम बढियो।
जय लील न ले तुमको
तुम तो संभले ही रहियो ।। टेक ।।

तू साथना ज्योत जगाएगा,
तो ब्रह्म निकटतम पाएगा।
जो ब्रह्म निकटतम पाएगा

तो जीवन सफल बनाएगा।
समृद्धि अमृत पाएगा।
समृद्धि बांटे परहित चाहे,
ऐसा मानव तुम बनियो ।। १ ।।

तू मानवतामय हो जाएगा,
तो सुखमय खुद हो जाएगा।
जो सुखमय खुद हो जाएगा,
तो हर का मीत हो जाएगा।

हर तेरा मीत हो जाएगा।
हर सुख बांटे दिव्यता चाखे
ऐसा मानव तुम बनियो ।। २ ।।