तेरी शरण में जो गया

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तेरी शरण में जो गया

तेरी शरण में जो गया,
भव से उसे छुड़ा दिया।
चाहे वह कितना पातकी,
पावन उसे बना दिया ।। टेक ।।
दर-दर भटकता है वही,
जो तेरे दर पे गया नहीं।
भूले से गर गया कहीं,
रस्ता उसे बता दिया ।। १ ।।

जिसको भरोसा हो गया,
बेड़ा ही पार हो गया।
अलमस्त फिर वो हो गया,
अमृत जिसे पिला दिया ।। २ ।।

भाग्य प्रबल उसी का है,
त्याग सफल उसी का है।
जीवन तो धन्य उसी का है,
जिसको तने अपना लिया ।। ३ ।।

तुम तो पतितों के नाथ हो,
भक्त जनों के साथ हो।
मुझ से अधम विमूढ़ को
दाता तूने अपना लिया ।।४।।