नीम की निबोली में अंगूर का है स्वाद कहां
नीम की निबोली में
अंगूर का है स्वाद कहां,
इत्र की खुशबू कहां
घोड़ों के तबेले में।
माटी के ढेलों में होती
मिश्री की मिठास कहां,
शुद्ध घी का स्वाद कहां
वनस्पति तेलों में ॥ १ ॥
दुर्जनों के संग होता
प्राप्त कहां सद् ज्ञान,
बुद्धि का विकास कहां
जुआ ताश खेलों में।
सच्चा सुख राघव है
ब्रह्मचर्य पालन में,
सुख नहीं पाया विषयादि
के झमेलों में ॥ २ ॥
चंदन के घिसते रहने से,
सौरभ में कमी नहीं आती।
गन्ने के टुकड़े-टुकड़े हों,
उससे मिठास क्या जा पाती ?
सोना तो और निखरता है,
भट्ठी में झोंखे जाने पर।
सज्जन न छोड़े सज्जनता,
संकट प्राणों तक आने पर।










