सोमरस दे दो प्रभु दे दो आह्लाद !
सोमरस दे दो
प्रभु दे दो आह्लाद !
दिव्य ज्योतियों में
है तव अन्तर्वास
सोमरस दे दो
ना अन्धकार में कोई सहाई
मार्ग ना देता कोई दिखाई
दे दो हृदय में प्रथित प्रकाश
सोमरस दे दो
कर दो आलोकित प्राणेन्द्रियों को
पाना चाहें तेरी ज्योतियों को
दे दो ज्योतिरूप प्रसाद
सोमरस दे दो
सुख-आनन्द की दे दो विभूति
अन्त: प्रकाश की दे दो ऊति
अघ-तम शत्रु ना देवें त्रास
सोमरस दे दो
सर्वविध पाना चाहें सौभाग्य
विद्वता वैराग्य वसुधन हो पास
सौभाग्य सिन्धु में कर दो स्नात
सोमरस दे दो
हे मेरे आह्लादक, चन्द्रेश्वर
पात्र बना लो वसुधन देकर
प्रेम से कर लो हृदय में निवास
दिव्य ज्योतियों में
है तव अन्तर्वास
सोमरस दे दो
भौतिक राजप्रसाद ना चाहें
केवल सत्य-प्रकाश ही चाहें
सोम प्रभु ! दे दो
सोम का स्वाद
दिव्य ज्योतियों में
है तव अन्तर्वास
सोमरस दे दो
प्रभु दे दो आह्लाद !
सोमरस दे दो










