सिंह सा साहस, बादल सा जोश
सिंह सा साहस, बादल सा जोश,
रण में गरजें जैसे गरुण की हुंकार।
धर्म की रक्षा, जन का सहारा,
स्वराज का दीपक, सूर्य समान।
⚔ शेरों के कुल में जन्मा जो वीर,
मुगलों के शासन से डटकर लड़े।
हर अन्यायी काँपे जिससे,
हिंदवी स्वराज का ध्वज जो गड़े।
🔥 रणभूमि में बिजली सा कौंधे,
शत्रु के हृदय में भय समा दे।
रण में उसकी गूंज जो उठे,
शत्रु की साँसें भी थम जाएं।
🚩 माँ भवानी का जिसने आशीष पाया,
हर हिंदू का जिसने मान बढ़ाया।
सिंहासन पर जब वह विराजे,
हिंदवी स्वराज का सूर्य उगाया।










