इस सुन्दर जीवन की कालिका

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इस सुन्दर जीवन की कालिका

इस सुन्दर जीवन की कालिका
कल प्रातः को जाने खिली न खिली
मलयागिरी की शुची शीतल मन्द
सुगन्ध समीर चली न चली

कली काल कुठार लिए फिरता
तन नम्र पे चोट झिली न झिली
भज ले प्रभु नाम अरी रसना
तू अन्त समय में हिली न हिली

इस दुनिया में आना जाना
रहे हमेशा जारी
सम्भल मुसाफिर तेरी एक दिन
आने वाली बारी

दुनिया में रहने वालों से
टूटे एक दिन प्यार तेरा
कोठी बंगला वन सम्पद पर
रहे नहीं अधिकार तेरा
हाथ हो खाली, छोड़ के ताली
और सम्पदा सारी
सम्भल मुसाफिर तेरी एक दिन
आने वाली बारी
इस दुनिया में आना जाना
रहे हमेशा जारी
सम्भल मुसाफिर तेरी एक दिन
आने वाली बारी
इस दुनिया में आना जाना

इस गाड़ी का ना टाईम टेबल
मास दिवस कोई डेट नहीं
रहे न टीटी देवे न सीटी
कभी भी होती लेट नहीं
बनी न पटरी रखे न गठरी
लेती सिर्फ सवारी
इस दुनिया में आना जाना
रहे हमेशा जारी
सम्भल मुसाफिर तेरी एक दिन
आने वाली बारी
इस दुनिया में आना जाना
रहे हमेशा जारी

क्या राजा क्या रंक सभी इस
गाड़ी में कर गए सफर
जिसने इस ड्राइवर को जाना
नाम वही कर गए अमर
सम्भल गए वो बदल गए
“राघव” जिन बात विचारी
इस दुनिया में आना जाना
रहे हमेशा जारी
सम्भल मुसाफिर तेरी एक दिन
आने वाली बारी
इस दुनिया में आना जाना
रहे हमेशा जारी