इस रयि धन से ही खेला जाए
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए
रयि-धन से धनी खेल सके ना
वह स्वामी नहीं दास हो जाए
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए
अग्नि देव आहुति ले देकर
देवों को पुष्ट बनाते हैं
विश्वाग्नि की तेज ज्वाला से
जन-जन का हित साधा जाए
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए
यज्ञ है सच्चे यश का कारण
ईर्ष्या द्वेष को दूर भगाए
जन-जन प्रेम का पात्र वो बनता
धन्य धन्य जीवन हो जाए
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए
जनता की शुभकामनाओं की
नौका पर चढ़ जाता याज्ञिक
यात्री बन जाता द्युलोक का
बढ़ कर आयु अनन्त हो जाए
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए
एक दूजे के यज्ञ को देख के
यज्ञ परम्पराओं को बढ़ाएँ
जिससे हो उद्धार जगत् का
दृढ़ संकल्प को क्यों ना जगाएँ
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए
रयि-धन से धनी खेल सके ना
वह स्वामी नहीं दास हो जाए
इस रयि धन से ही खेला जाए
खेला जाए










