छोडो माया का ये झमेला

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छोडो माया का ये झमेला

छोडो माया का ये झमेला
टंकारा में लग रहा मेला

तू पीछे न रह जा अकेला
टंकारा में लग रहा मेला

बड़े बुजुर्ग आयेंगे
साथ बालक को लायेंगे
माता-बहिन भी आयेंगे
सखी-सहेली को भी लायेंगे
तू सोया पड़ा है क्यूं अकेला..
टंकारा में लग रहा मेला..

जाने-माने वैज्ञानिक आयेंगे
ब्रह्मज्ञानी-ध्यानी भी आयेंगे
मन्त्री-सन्त्री भी आयेंगे
तर्क शास्त्री भी आयेंगे
अहंकारी तू रह जायेगा अकेला.
टंकारा में लग रहा मेला..

साधु-सन्त भी आयेंगे
योगी-महन्त भी आयेंगे
घर-घर से आयेंगे
ढाणी-ढाणी से आयेंगे
गांव-गांव से आयेंगे
देश-विदेश से आयेंगे
आंगन में तू पड़ा रह जायेगा अकेला.
टंकारा में लग रहा मेला ..

ना “अम्बालाल ” आया
ना जरा हरखाया
ना आनन्द उत्सव उर
अन्तस को भाया
तेरे कर्मों का है ये खेला.
टंकारा में लग रहा मेला..