जग में तुझसा कोई ना, कर जोड़ आए
जग में तुझसा कोई ना
कर जोड़ आए
तेरी शरण प्रभु
कर तू दया
दु:ख के हर्ता,
दु:खहर्ता
जग में तुझसा कोई ना
हाथ मेरे खाली
क्या बोले वाणी ?
मुझको अपना लो
अबन्धुओं के बन्धु प्रभु
तुझको सदा ही नमन करूँ
अहंकार तज सीख बाँध ली
लक्ष्य मिला तुझसे दाता
तुझसे दाता
जग में तुझसा कोई ना
सबके अन्त:करण की सुने
ज्ञान-दान से झोली भरे
तेरी कृपा है बड़ी पावनी
कामना सबकी तू ही जाने
कभी मित्रता तोड़े ना
तोड़े ना
जग में तुझसा कोई ना
कई जन्मों की पुण्याई
पल-छिन तूने कृपा दिखाई
निज कर्मों के फल को मानूँ
कभी अनिष्ट ना किया प्रभुजी
हमें भी ये प्रण दे दो ना !
दे दो ना !।।
जग में तुझसा कोई ना
कभी छोडू ना तेरा दामन
तेरी शरण में मेरा पालन
घन-सम दया-दृष्टि बरसा दे
या तो सीख तुम्हीं से लेंगे
या प्राणों से प्रीति ना
प्रीति ना
जग में तुझसा कोई ना
कर जोड़ आए
तेरी शरण प्रभु
कर तू दया
दु:ख के हर्ता,
दु:खहर्ता
जग में तुझसा कोई ना










