तेरी मृदुलता-मेरी ढिठाई

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तेरी मृदुलता-मेरी ढिठाई

तेरी मृदुलता – मेरी ढिठाई
भला इनमें किसकी,
करूँ मैं बड़ाई

बहे नित्य तेरा पवन, प्राणदाता
मधुर लोरियाँ जिसने पत्तों में गायीं

बहें नित्य झरनें, बहें नित्य नदियाँ
कहीं मेघ में आन झरियाँ लगायीं

सदा अन्न भण्डार तेरे भरे हैं
कहीं खेतियाँ हँस रहीं लहलहाई

उषा और सन्ध्या, वही दिव्य लाली
लिये थाल में नित्य देती दिखाई

फँसा पाप के पंक में हूँ मैं फिर भी
मुझे हाय लज्जा तनिक भी न आई

तेरी मृदुलता – मेरी ढिठाई
भला इनमें किसकी,
करूँ मैं बड़ाई