मैंने वेद माता की, स्तुति की हृदय से

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मैंने वेद माता की,स्तुति की हृदय से

मैंने वेद माता की
स्तुति की हृदय से
और शुभ चिन्तन किया है
विदुर वेदमाता के ज्ञान-उपदेशों से
सार्थक जीवन जिया है
मैंने वेद माता की
स्तुति की हृदय से
और शुभ चिन्तन किया है

वेदमाता का स्तवन-अध्ययन
अर्थ-चिन्तन और गान करें
जीवन का उसे अङ्ग बनाकर
अमृतरस का पान करें
है वेद माता गायत्री
गायें उसे दिवस व रात्रि
परमेश्वर-रूप कवि का


गायन है हृदयवासी
हर इक द्विज को जिसने
पावन किया है
मैंने वेद माता की
स्तुति की हृदय से
और शुभ चिन्तन किया है

सुनना हो सुन लो
ज्ञानियों का अनुभव
वेद-स्तवन से दीर्घायु सम्भव
दीर्घ जीवन में प्राणवान बनके
पाईं प्रजायें सुयोग्य और अनवर
पशुपालन की शिक्षा दी


मन्त्रों ने यश कीर्ति दी
हुई पूजित-धन की प्राप्ति
ब्रह्मतेज की आत्मिक शान्ति
बस निश्चित समझ लो
सब कुछ दिया है
मैंने वेद माता की
स्तुति की हृदय से
और शुभ चिन्तन किया है

विद्या की देवी, सरस्वती मात ने
करा दी हृदयंगम विविध विधाएँ
आत्मलोक में, हुईं प्रतिष्ठित
ऐश्वर्य-निधियों की, बहा दी धाराएँ
बनी आत्म-अङ्ग वो मेरी


किरणें निखरीं सुनहरी
माँ की वाणी है स्नेही
और मुझे बनाया सेवी
वेदमाता ने हृदयों में
घर कर लिया है
मैंने वेद माता की


स्तुति की हृदय से
और शुभ चिन्तन किया है
विदुर वेदमाता के ज्ञान-उपदेशों से
सार्थक जीवन जिया है
मैंने वेद माता की
स्तुति की हृदय से
और शुभ चिन्तन किया है