शिव विवाह की रात्रि-शिवरात्रि
शिव विवाह की रात्रि-
शिवरात्रि।
पुरुष-प्रकृति के महामिलन का पर्व।
अर्द्धनारीश्वर की उत्पत्ति का गर्व।
आस्था का शिखर।
महालिंग प्रखर।
सज्जा और शृँगार।
भक्ति की शक्ति का त्यौहार।
करसन जी तिवारी का परिवार।
मूलशंकर का व्यवहार।
रात्रि जागरण का संकल्प।
निंद्रा अविकल्प।
लिंग पर पुष्प-पत्र-प्रसाद।
मूषक का अलबाद*।
विश्वास की बुनियाद।
मूरत में देवत्व पर विवाद।
भ्रम या विभेद?
आस्था में भेद?
या फिर आत्मबोध?
सत्य का परिशोध?
गृह त्याग-
पलायन या जिज्ञासा संधान?
अन्वेषण और अनुसंधान।
घनघोर तपस्या या आत्ममंथन?
भ्रम निवारण हेतु गम्भीर चिंतन?
असत्य का उन्मूलन।
आशाद्वीपोदय।
सद्गुरु की प्राप्ति-
अर्जित ज्ञान से निवृत्ति।
मेधा, विवेक और भाव शुद्धता।
उद्देश्य की पवित्रता।
समाज की जागृति।
राष्ट्र की उन्नति।
परतंत्रता की ग्लानि,
स्वतंत्रता का उद्बोध।
आओ महर्षि के बोध
पर, करें आत्मशोध।
हाँ!
बोध पर शोध।
महाशिवरात्रि का संदेश।
ऋषि बोध दिवस पर विशेष।










