कभी नहीं सोचा तूने
कभी नहीं सोचा तूने
बैठ कर, अकेले में
कौन तेरा, तू है किसका
दुनिया के मेले में
कौन साथ आया तेरे
कौन साथ जायेगा
लाया था क्या
ले जायेगा
डाल कर के थैले में
क्या किसी से लिया तूने
क्या किसी को दे दिया
जीवन ही समाप्त किया
इस दे-दे, – ले-ले में
सुख-दु:ख, हानि-लाभ
शोक-हर्ष, जीत-हार
यही तो उपलब्धियाँ हैं
जगत् के झमेले में
जीवन का उद्देश्य यदि
“प्रेमी” नहीं जाना तू
हीरा जनम लुटा दिया
टूटी कौड़ी ढेले में
कभी नहीं सोचा तूने
बैठ कर, अकेले में
कौन तेरा, तू है किसका
दुनिया के मेले में










