ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे,
सुन्दर मानुष काया देकर
जगत् के खेल खिलाते न्यारे
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे
उमड़ घुमड़ कर लहरें आतीं
आ तट पर रेखाएँ बनातीं
बार-बार हर्षित लहरों को
सागर तट पर कौन पुकारे ?
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे
जल में दिखाता चाँद की छाया
अनुज खिलौना सुन्दर माया
खेल सौम्यता का मैं खेलूँ
पर रह जाता हाथ पसारे
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे
बहती जीवन नैया बहके
खेल हारता हूँ रह-रह के
जिसको तुझ सा मिले खिलाड़ी
वह जीवन में कभी ना हारे
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे
वेदमाता की वाणी सुन के
आती प्रेरणा शक्ति बन के
मन भरा आता नैन छलकते
जीवन-ज्योति प्रभु निखारे
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे
सुन्दर मानुष काया देकर
जगत् के खेल खिलाते न्यारे
ऐसे हैं प्रभु प्रीतम प्यारे










