धन के कारण नष्ट हुआ है
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
सोचा धन से जीवन सजता
बात क्या है ! यह धन ने ही मारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
लाँघ गया यह धन मर्यादा
धन ही बन गया मानव का राजा
सर्वोन्नति में बाधक बन कर
सुख-वैभव का आनन्द बिगाड़ा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
धन के जङ्ग ने छेड़ा तमाशा
त्रिविध तेज भी छिनता जाता
त्रिविध वीर्य भी नष्ट हुआ है
मद के अन्धकार ने मारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
इसलिए जागो प्यारे मनुष्यो !
स्वार्थी-धन की मार से बच लो
करें विनम्र स्तुति महेन्द्र की
जिससे जग है विभूषित न्यारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
है ईश्वर ऐश्वर्य सम्राट
नियमकर्ता राजाधिराज
जो उसके नियमों को धारे
लोभ लाचारी का ना हो मारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
आध्यात्मिक भौतिक ऐश्वर्य
हैं ये साधन ना बन जाएँ लक्ष्य
लक्ष्य है दान जो करता उन्नति
निष्कामी नर नारी के द्वारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
भजन किया हमने ‘स्वराट्’ का
धन सेवक बना आया लाभ का
पूजित धन पाया इन्द्र का धारा
अन्धकार भगा चमका तारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा
सोचा धन से जीवन सजता
बात क्या है ! यह धन ने ही मारा
धन के कारण नष्ट हुआ है
देखो आज यह सन्सार सारा










