मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही

0
51

मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही

मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही
करता रहेगा नित गुणगान
वह हमसे यज्ञ करवाता रहेगा
हमको भी देगा देवों का दान
मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही

वह प्रेरणादायक है ‘इन्दु’
है चन्द्र के जैसा आल्हादक
आते हैं जो उसके सम्पर्क में
उन देवों को करता शान्त पावक
जब देखता है पुरुषार्थ देवों का


अपने आशीष से करता सफल
और देव प्रसन्न चित्त होकर
गुणगान से थामते हैं आंचल
बनते हैं सहाई सर्वप्रकार से
ईश-कृपालु दया-निधान !


वह हमसे यज्ञ करवाता रहेगा
हमको भी देगा देवों का दान
मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही

वह पावन है सबको करता है
यज्ञ कर्मों से ही पूरुपावन
वेदों की उच्च शिक्षाओं से
बरसाता प्रेरणा का सावन


वह साधक को देता है शान्ति-आह्लाद
और देता है निज गुणों का प्रसाद
विषयों से ऊपर उठ के साधक
करते हैं दूर विघ्न-विषाद
ऋत-सत्य पे श्रद्धा रख के


देव ही करते हैं अमृत पान
वह हमसे यज्ञ करवाता रहेगा
हमको भी देगा देवों का दान
मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही

हे परमेश्वर के उपासको !
तुम भी तो देवों सा कर्म करो
ईश्वर की भक्ति-उपासना से
सुख सौभाग्यों को प्राप्त करो
तुम अन्तर्ध्यान के धारण से


ईश्वर की झाँकी को व्याप्त करो
और दिव्य गुण कर्म स्वभाव वालों के
सानिध्यों में वास करो
और शान्त आह्लादक याज्ञिक बनकर
पा ही लेवें आनन्द धाम
वह हमसे यज्ञ करवाता रहेगा


हमको भी देगा देवों का दान
मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही
करता रहेगा नित गुणगान
वह हमसे यज्ञ करवाता रहेगा
हमको भी देगा देवों का दान
मन श्रद्धा भक्ति से ईश्वर का ही