मन में जो ओ३म् समाये
मन में जो ओ३म् समाये
जीवन नैया तर जाये
ऐसे में प्रभु तेरे दर्शन
एक रङ्ग रङ्गाये
मन में जो ओ३म् समाये
तेरी दया से भगवन्
तर गए अनेकों मुनिजन
तेरे ही ध्यान में प्रभुजी
सुध विसार भूले तन-मन
तेरी लगन प्रभुजी
अपने दिल में लगा लूँ
मन में जो ओ३म् समाये
बल बुद्धि विद्या दे दो
वेदों की शिक्षा दे दो
धर्म पर चलने की प्रभुजी
परिपूर्ण इच्छा दे दो
निष्काम कर्म से अपना
जीवन सजा लूँ
मन में जो ओ३म् समाये
दर्शन के प्यासे नैना
तुझ बिन ना पाए चैना
ऐ मन ! यह तुझसे कहना
प्रभु आस में ही रहना
आसन बिछा मन-मन्दिर में
तुझको बिठा लूँ
मन में जो ओ३म् समाये
ओ३म् गुणों की है खान
आनन्दरूप सुखधाम
वेदों ने गाया गुणगान
ओ३म् ही जीवन कल्याण
ओ३म् की ज्योति अपने
मन में जगा लूँ
मन में जो ओ३म् समाये
रसना तू जप ले ओ३म् नाम
भज मन तू प्रातः और शाम
भक्ति का पा ले वरदान
चरणों में देंगे प्रभु स्थान
घट-श्वास रोम-रोम में
प्रभु को रमा लूँ
मन में जो ओ३म् समाये
तेरे समर्पण हूँ मैं
बलिहार तुझ पर हूँ मैं
तेरी ही महिमा गाऊँ
अपरम्पार तू है
सब तेरा तू मेरा प्रभु जी !!
तुझको मैं पा लूँ
मन में जो ओ३म् समाये
जीवन नैया तर जाये
ऐसे में प्रभु तेरे दर्शन
एक रङ्ग रङ्गाये
मन में जो ओ३म् समाये










