प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है
प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है
उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है
झूठी ममता से करके किनारा,
लेके सच्चे पिता का सहारा
जो उसकी रजा में रजामन्द है
उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है
जिसकी कथनी में कोयल सी चहक है
और करनी में फूलों सी महक है
प्रेम नगरी में जिसकी सुगन्ध है
उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है
निन्दा चुगली न जिसको सुहावे
बुरी संगत की रंगत न आवे
सत् संगत ही जिसको पसन्द है
उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है
प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है
उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है
दीन दुखियों के दुःख जो घटाये
बनके सेवक भला सबका चाहे
वेद पढ़ना ही जिसको पसन्द है
उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है










