खिला मन रे, खिला मन रे !

0
30

खिला मन रे, खिला मन रे !

खिला मन रे!
खिला मन रे !
उषा किरणें प्रभा लाई
सुगन्धित हुई धरा भी
यह नभ भी हुआ गुलाबी
प्रभु की याद भी
आ गई


हृदय खिल-खिल के
खिला मन रे!
खिला मन रे !
उषा किरणें प्रभा लाई

संध्या-हवन किया
ऽऽऽऽऽऽऽ
अमृत रस पिया
ऽऽऽऽऽऽऽ
हुई यज्ञ की
अनुभूतियाँ


बढ़ीं जीवन में
संगतियाँ
हुई देवों की पूजा
भाव दान का गूँजा
हुआ दूर मल से


खिला मन रे!
खिला मन रे !
उषा किरणें प्रभा लाई
सुगन्धित हुई धरा भी
यह नभ भी हुआ गुलाबी
प्रभु की याद भी
आ गई


हृदय खिल-खिल के
खिला मन रे!
खिला मन रे !
उषा किरणें प्रभा लाई

यज्ञमय प्रभु
ऽऽऽऽऽऽऽ
जगत् के विभु
ऽऽऽऽऽऽऽ
हृदय सरस दे
निज दरस दे


भाव अमद के
प्रभु-वरद ! दे
क्रोध ईर्ष्या तजें
अहिंसा से सजें
प्रेम भावों से


खिला मन रे!
खिला मन रे !
उषा किरणें प्रभा लाई
सुगन्धित हुई धरा भी
यह नभ भी हुआ गुलाबी
प्रभु की याद भी
आ गई


हृदय खिल-खिल के
खिला मन रे!
खिला मन रे !
उषा किरणें प्रभा लाई