कब दूर प्रभु हैं हमसे
कब दूर प्रभु हैं हमसे
करो चिन्तन निर्मल मन से
सुख मिलेगा भक्ति भजन से
करने की अपने तन से
ये जीवन तो एक दिन जाना है
लौट कर नहीं आना है
ये बचपन खेल खिलौना
कुछ दिन का स्वप्न सलौना (1)
जब जाये जवानी तेरी
फिर बाद पड़ेगा रोना
जब आए तुझे बुढ़ापा
कहते हैं सभी बुरा आपा
ऐसे मिट जाये जग से
जैसे पानी बीच बताशा
ये जीवन तो एक दिन जाना है
लौट कर नहीं आना है
ऋषियों मुनियों का कहना
बुरे कर्म से बचते रहना
जीवन में यदि दु:ख आए
उन्हें हस हस के सह लेना
गर तेरी सच्ची भक्ति
मिले दुख सहने की शक्ति
चलना तू सम्भल सम्भल के
तुझे मिल जाएगी मुक्ति
ये जीवन तो एक दिन जाना है
लौट कर नहीं आना है
दुनिया है एक पहेली
नहीं समझ किसी को आए
कहीं सजे सुनहरी रातें
कोई दीपक रहा बुझाये
क्या खोया और क्या पाया
कभी ये भी हिसाब लगाया
क्या कभी प्रेम से आ कर
ईश्वर को शीश झुकाया
ये जीवन तो एक दिन जाना है
लौट कर नहीं आना है










