किए कर्म का फल मिलता

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किए कर्म का फल मिलता

किए कर्म का फल मिलता
क्यों नहीं समझ में आई ।
जैसी करनी वैसी भरनी
बात साफ बतलाई।।टेक।।

शुभ कर्मों की डगर त्याग
लई पाप करण की ठान तनै।
मात-पिता का वृद्धापन में
बहुत किया अपमान तनै।
अपने तन का लहू सुखाकर
बना दिया बलवान तनै।
कड़वी वाणी सुना सुना कर
दुखी किया नादान तनै।
दिया नहीं सम्मान तनै
अब तबीयत क्यों घबराई।।1।।

जैसी करनी वैसी भरनी
बात साफ बतलाई ।।

दुनियादारी यारी प्यारी
संसारी लई मान तनै।
काया माया देख लुभाया
पाया ना कुछ ज्ञान तनै।
काम क्रोध मद लोभ मोह में
माटी की बेरान तनै।
दारुण दुख भी भोग लिया
पर भजा नहीं भगवान तनै।
नहीं कर्मों की पहचान तनै
नित नई बीमारी पाई।।2।।

जैसे करनी वैसी भरनी
बात साफ बतलाई ।।

जितने भी है जीव जगत में
उन्हें सताना ठीक नहीं ।
चोरी जारी रिश्वतखोरी से
द्रव्य कमाना ठीक नहीं ।
पर नारी की बुरी बीमारी
खुद घर लाना ठीक नहीं ।
बिन श्रद्धा अपमान जहां
वहां भोजन पाना ठीक नहीं ।
कहीं आना जाना ठीक नहीं
जब बाहर छिड़ी लड़ाई ।।3।।

प्रात: काल उठ नित्य नियम से
ईश्वर ध्यान लगाया करो ।
शुद्ध सात्विक करो आचरण
दैनिक यज्ञ रचाया करो ।
पंच महायज्ञ प्रतिदिन करके
“मनहर” पुण्य कमाया करो ।
धर्म कर्म का मर्म जान
जीवन को सफल बनाया करो।
गुरु “ताराचंद” जगाया करो
जो नींद पाप गहराई ।।4।।
जैसी करनी वैसी भरनी
बात साफ बतलाई।।