हे देवियों ! तुम हो पूर्ण प्रकाशमयी

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हे देवियों ! तुम हो पूर्ण प्रकाशमयी

हे देवियों ! तुम हो
पूर्ण प्रकाशमयी
और तुम ही हो प्रकाशदात्री
हो अखिल दिव्य गुणों से सुशोभित
तुम ही हो मनोमय गायत्री
राष्ट्रयज्ञ में आओ
तुम बर्हि बनकर
बन जाओ तुम हृदयवासिनी
हे अस्त्रिध और मयोभुव!
राष्ट्रों की सुखदायिनी देवियों
करते तुम्हारा हम पूजन
इळा – सरस्वती
और मही की महिमा
गाई है वेदों ने हरदम
तीनों ही देवियाँ
यज्ञाङ्ग बनकर
करें चतुर्मुखी विकसित जीवन

वैखरी मध्यमा पश्यन्ति
वाणी रूप है देवियाँ अनुग्रही
इळा हमारी है स्थूल वाणी
होती उच्चारित वाणी वैखरी
सरस्वती मनवासिनी वाणी है
मध्यमा है यह विचारात्मक वाणी
परा पश्यन्ति दो रूपों में रहती
आत्मवसित है प्रतिष्ठित मही
करती अध्यात्म-विकासन
इळा – सरस्वती
और मही की महिमा
गाई है वेदों ने हरदम
तीनों ही देवियाँ
यज्ञाङ्ग बनकर
करें चतुर्मुखी विकसित जीवन