प्यारे ! क्यों घबराए?

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प्यारे ! क्यों घबराए ?

प्यारे ! क्यों घबराए ?
भय से क्यों बौराये ?
ईश्वर की ले ले शरणी
क्षण में भय टल जाए
यही तो है सत्य,
सनातन है तथ्य
बाकी कुछ भी ना हाथ आए
यही तो जगत् रोज़ दिखलाए

इस महासत्य पे कर विश्वास
बस फिर निर्भय हो जा आज
संसार में दु:ख और क्लेश
आत्मा में करते रहते प्रवेश
पर जो अनित्य ही है
उसका क्या तथ्य है?
पर जो है नित्य उस
प्रभु में मन लगा ले
प्यारे ! क्यों घबराए ?
भय से क्यों बौराये ?
ईश्वर की ले ले शरणी
क्षण में भय टल जाए
यही तो है सत्य,
सनातन है तथ्य
बाकी कुछ भी ना हाथ आए
यही तो जगत् रोज़ दिखलाए

जैसे सूर्य है सदा से अटल
कब तक छिपा सकते हैं बादल
जो है सर्वज्ञ, स्वरूप अनल
ऐसे प्रभु की शरणी प्रबल
यह जो समझ में आ जाए
भय सारे मिटते जाएँ
आश्रय मिले प्रभु का
चिन्ता मिट जाए
प्यारे ! क्यों घबराए ?
भय से क्यों बौराये ?
ईश्वर की ले ले शरणी
क्षण में भय टल जाए
यही तो है सत्य,
सनातन है तथ्य
बाकी कुछ भी ना हाथ आए
यही तो जगत् रोज़ दिखलाए

इसलिए प्यारे ना घबरा
उसकी निकटता शीघ्र ही पा
छोटे-बड़े भय सभी मिटेंगे
जग-बन्धक भय कहाँ रहेंगे
ना जीना ना मरना
जगत् से पार तरना
निर्भीक होके मुक्ति-पद को पा जाएँ
प्यारे ! क्यों घबराए ?
भय से क्यों बौराये ?
ईश्वर की ले ले शरणी
क्षण में भय टल जाए
यही तो है सत्य,
सनातन है तथ्य
बाकी कुछ भी ना हाथ आए
यही तो जगत् रोज़ दिखलाए
प्यारे ! क्यों घबराए ?