भजन कर ईश का प्राणी
भजन कर ईश का प्राणी
अगर आनन्द पाना है
कर्म उत्तम तू करता जा
अगर सम्मान पाना है
बस कर्म का खजाना
तेरे साथ जाना है
जो जैसा बीज बोता है
वो फल वैसा ही पाता है
कभी मिर्ची के बदले में
न मीठा आम खाता है
करता रहे जो बुराई सदा
बैर नफरत जो करता है
उसे न चैन पाना है
कर्म उत्तम तू करता जा
अगर सम्मान पाना है
बस कर्म का खजाना
तेरे साथ जाना है
भलाई करने वाले से
बुरा तूने किया होगा
लहू निर्दोष का विहस्की
समझ कर के पिया होगा
एक दिन तुझे पछताना पड़े
भले की भावना रख कर
तुझे गिर कर संभलना है
कर्म उत्तम तू करता जा
अगर सम्मान पाना है
बस कर्म का खजाना
तेरे साथ जाना है
ये तेरी ठंडी आहे ही
तेरे सुख दु:ख का साया है
कभी जलता है दिन तूने
किसी का दिल दुखाया है
एक दिन तुझे पछताना पड़े
किसी मजलूम के जलते
हुए घर को बचाना है
कर्म उत्तम तू करता जा
अगर सम्मान पाना है
बस कर्म का खजाना
तेरे साथ जाना है










