जीवन के अन्तिम क्षण तक भी
जीवन के अन्तिम क्षण तक भी
नाथ !!! सुपथ पर मुझे चलाना
भूल गर यदि कभी जाऊँ – कुपथ पर
खींच मुझे तुम वापस लाना
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
ओ३म् नाम के हीरे मोती
बिकते बिना ही दाम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
वचन भुलाये तूने अपने
झूठे जग से जोड़े सपने
जनम जनम के परमपिता का
कैसे भूला नाम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
इस जग में आकर के बन्दे
कर्म कमाये सारे मन्दे
अन्त समय में पछताएगा
ले ले प्रभु का नाम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
इतना छोटा नाम प्रभु का
बड़ा ही प्यारा नाम प्रभु का
कर ले लाखों प्राणी प्यारे
भजते ओ३म् का नाम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
दूर अन्धेरा कर ले मन का
पावन लक्ष्य बना जीवन का
मन मन्दिर में लागे समाधि
बनता पूर्ण काम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
ओ३म् ओ३म् नित शाम सबेरे
ऐसी रटन लगा मन मेरे
ओ३म् ओ३म् ओ३म् बोलो
ओ३म् ओ३म्
मात-पिता और बन्धु-सखा सब
ओ३म् ही पूर्ण धाम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !
ओ३म् नाम के हीरे मोती
बिकते बिना ही दाम
ओ३म् नाम सुखधाम रे मनवा !










