वह शक्ति हमें दो दयानिधे !!
वह शक्ति हमें दो दयानिधे !!
कर्त्तव्य मार्ग पर डट जायें
पर सेवा, पर उपकार में हम
जग जीवन सफल बना जावें
हम दीन-दु:खी, निबलों-विकलों के
सेवक बन सन्ताप हरें
जो हैं अटके भूले-भटके,
उनको तारें खुद तर जावें
छ्ल-दम्भ द्वेष, पाखण्ड-झूठ
अन्याय से निशदिन दूर रहें
जीवन हो शुद्ध सरल अपना
शुचि प्रेम-सुधा रस बरसाएँ
निज आन-मान मर्यादा का
प्रभु ध्यान रहें, अभिमान रहे
जिस देश जाति में जन्म लिया
बलिदान उसी पर हो जावें
वह शक्ति हमें दो दयानिधे !!
कर्त्तव्य मार्ग पर डट जायें
पर सेवा, पर उपकार में हम
जग जीवन सफल बना जावें










