प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई

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प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई


प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई
तेरे बल का पार न पाया
कण-कण ने तेरी कृपा दिखाई
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई

जब माना तू ही बलशाली
छूटी गर्व की छाया काली
भूल ने शूल की व्यथा सुनाई
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई

देखे बल तेरे जो है घनेरे
कहने लगे हम तो हैं तेरे
हमरे बल की देखी खाई
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई

तुझ दाता के लिए जीते हैं
तू दे तो अमृत पीते हैं
करो ना उपेक्षा सुधी सहाई
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई

श्रद्धा-भक्ति-स्तुतियाँ हमारी
तुम ही स्वीकारो हे बलधारी!
हमने तुझे निज चाह बताई
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई

तेरे बिना सुखदाता ना कोई
जो है बली दाता भी सोई
अन्यत्र जाऊँ कहाँ ? हे सुखदाई?
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई
तेरे बल का पार न पाया
कण-कण ने तेरी कृपा दिखाई
प्यारे प्रभुजी! तूने सृष्टि रचाई