हे पूज्य पिता मेरा तू ही

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हे पूज्य पिता मेरा तू ही

हे पूज्य पिता मेरा तू ही,
तू ही मेरी माता है।
है इष्ट मित्र मेरा तू ही,
और तू ही मेरा भ्राता है।
है विद्या का भंडार तु ही,
और तू ही धन दाता है।
है देवों का महादेव तुही,
न्यूं धर्मी तुझको गाता है।

बिना हाथ रचना कर्ता है,
बिन पग आता जता है।
बिना कान सब की सुनता है,
नैनों नहीं लखाता है।
बिना हृदय सब जग की जाने,
जग उसको ना पता है।
धर्मी ऐसा सर्वश्रेष्ठ वह,
माहापुरुष कहलाता है।