स्वतन्त्र हैं, स्वतन्त्र रहना चाहते हैं।
स्वतन्त्र हैं,
स्वतन्त्र रहना चाहते हैं।
कितने स्वतन्त्र हैं ?
कितने स्वतन्त्र होना चाहते हैं ?
जीवन में स्वतन्त्रता चाहिए,
कब ? कितनी ? कैसे ?
सुख भोगने में स्वतन्त्र,
और दु:ख भोगने में ?
व्यक्तिगत जीवन में,
और सामाजिक जीवन में ?
कर्म करने में,
और फल भोगने में ?
जिस स्वतन्त्रता की इच्छा है,
उसे भोगने के लिए,
स्व-तन्त्र बनाया है ?
कितना ?
या पर-तन्त्र पर आश्रित हैं ?
कितने?
स्वाश्रित स्वतन्त्रता,
पराश्रित स्वतन्त्रता।
स्वतन्त्रता भी पराश्रित ?
तो वह स्वतन्त्रता ही क्या हुई ?
पर होती तो है,
वह चाहिए ? वही चाहिए ?
स्वयं पुरुषार्थ से बनाई स्वतन्त्रता,
अन्यों से प्राप्त स्वतन्त्रता।
आनन्द तो दोनों में है,
कम या अधिक या समान ?
एक कष्ट युक्त स्वतन्त्रता,
एक कष्ट रहित स्वतन्त्रता।
कौन सी कष्ट युक्त ?
कौनसी कष्ट मुक्त ?
इस निर्णय में भी सब स्वतन्त्र हैं,
लीजिए आनन्द स्वतन्त्रता का।
अब चुप होना ठीक है, ठीक है ?
कम से कम स्वतन्त्रता दिवस पर।।










