जो नअष्ट धर्म को कर्ता है
जो नअष्ट धर्म को कर्ता है,
उस नअष्ट धर्म भी कर्ता है।
जो धर्म की रक्षा कर्ता है,
तो धर्म कष्ट सब हर्ता है।
एसलिए धर्म को मत मरो,
मरने पर तु भी मारता है।
जन धर्मी नीर्भय विचरत है,
पापी जन सबसे डरता है।
धन धरनी में रह जाएगा,
गज घोड़े साथ ना जाएंगे।
ना साथी साथ निभाएंगे,
यह देह चिता में जर जावे,
ना चिन्ह दृष्टि में आएंगे।
हम धर्मी जिसको धर्म कहें,
परलोक में संग में जाएंगे










