स्वार्थी हुआ प्रेम का नाता।
स्वार्थी हुआ प्रेम का नाता।
अब सच्चा वाला प्रेम कहाँ?
पूजे जाते थे पशु पक्षी जहाँ।
अब वो गोपालक देश कहाँ?
भूखी मरती हैं अब गौमाता,
पानी पीने को गला तरसता।
कहने को गौपालक बनते हैं,
निभाता कौन गाय से रिश्ता?
टीस मेरे मन रह- रह चुभती,
गौमाता हमसे न पाली जाती।
जो हम सबका पालन करती ,
आखिर क्यों भूखी सो जाती।
गाय हमारी माता कहलाती ,
करती है पञ्च गव्य प्रदान।
बछड़े बैल बन साथ निभाते,
खेती में करते हैं श्रम- दान।
गाय की सुरक्षा फर्ज हमारा,
हम अपना दायित्व निभायें।
सुबह -शाम गाय को रोटी,
श्रद्धानुसार जरूर खिलायें।










