यज्ञ कर यज्ञ कर, प्रतिदिन यज्ञ कर
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
बन जाएगा अग्नि समान
हो जाएगा तू भी महान्
यज्ञ करते करते ही प्रतिदिन
होगा आत्मिक उत्थान
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
जो भी प्रतिदिन अग्नि जलाकर
अग्निहोत्र रचाए सुधाकर
अग्नि गुण जब बरसाए
बन जाएगा वो निष्काम
निष्काम-निष्काम
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
आत्मज्योति को प्रगटाओ
सात अग्नि के गुण पाओगे
बाह्य यज्ञ से आत्मिक बेहतर
हो जाओगे अति गुणवान्
गुणवान्-गुणवान्
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
आत्म निरीक्षण, आत्मिक चिन्तन
अन्तर्मन का होगा सिंचन
होगा अन्तर्मन का क्षालन
मन करेगा मेधावी काम
कृती काम-कृती काम
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
ज्ञान सूर्य सविता की किरणें
आत्मा को दे देगी संवरने
सत्य वेद आदि ग्रंथों को पढ़के
हो जाएगा तमस् तमाम
अवसान-अवसान
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
‘धी’ को सुधी ही करे प्रकाशित
फिर क्यों हों ना प्रभु के आश्रित
क्षालित उद्धार का मार्ग
दे “ललित” सुखद परिणाम
परिणाम -परिणाम
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर
बन जाएगा अग्नि समान
हो जाएगा तू भी महान्
यज्ञ करते करते ही प्रतिदिन
होगा आत्मिक उत्थान
यज्ञ कर यज्ञ कर
प्रतिदिन यज्ञ कर










