दुनिया को देख दुनिया, हैरत में आ रही है

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दुनिया को देख दुनिया, हैरत में आ रही है
शक्ति है कौन ये जो, चक्कर चला रही है (1)

भानु शशि सितारे, दिन रात घूमते हैं
_किसकी महान् माया, इनको घुमा रही है (1)

ऊँचे पहाड़ देखो, हिम की चटान वाले (2)
गङ्गा से पूछा हमने, भागी क्यों जा रही है

भूमि को खोद कर के, देखा तो जल भरा है
भूमि में जलजलों में, भूमि समा रही है

बालक जो गर्भ में हो, माता से पूछ देखो
सच सच बता दे माता, तू क्या बना रही है

माता-पिता ही दोनों, इन्कार कर गये हैं
दोनों से न्यारि शक्ति, रचना रचा रही है

निशा में आकाश देखो, मालिक की वाटिका में
दीपक से जल रहे हैं, छवि कैसी छा रही है

जग को बनाने वाला, जग में ही रम रहा है
रचईता की शान “भीष्म”, रचना दिखा रही है

दुनिया को देख दुनिया, हैरत में आ रही है
शक्ति है कौन ये जो, रचना रचा रही है