हे निष्कलंकता के देव ! स्वार्थों से हटा दो
हे निष्कलंकता के देव !
स्वार्थों से हटा दो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !
ब्रह्म हत्या, सुरापान,
व्यभिचार चोरी से
कन्या-विक्रय गो-वध से
निन्दा जमाखोरी से
इन पापों से करो दूर
हमें शुद्ध बना दो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !
कुछ ऐसे भी हैं सत्पुरुष
जो त्याग देते स्वार्थ
परहित के लिए करते हैं
प्रतिदिन पृथु पुरुषार्थ
ऐसे देवों के साथ प्रभु
हमको बिठा दो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !
कुछ ऐसे भी राक्षस हैं जो
परहित को करते नष्ट
और स्वार्थ साधन के लिए
रहते हैं मदमस्त
ऐसे कर्तव्य-हीनों से
प्रभु दूर करा दो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !
कुछ ऐसे हैं जो निष्प्रयोजन
देते रहते कष्ट
क्या नाम दें उनको प्रभु
जिनका आशय ना स्पष्ट
ऐसे जो त्याज्य लोग हैं
आँखों से हटा दो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !
हे सोम प्रभु !! सौम्य सुखद
कीर्तिमान सु-शेव
मेरे लिए सु-शेव रहो
आनन्दकारी देव
हे दाता !! दिव्यानन्द के
मुझे गले से लगा लो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !
स्वार्थों से हटा दो
हे सोम राजा राजवंत
अंहस् से बचा लो
हे निष्कलंकता के देव !










