कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

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कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो
काव्य मङ्गल तुम्हरा
सहृद् हृदय-आल्हादक स्वामी
क्रान्तदर्शी प्रयता
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

दूरगामी परिणाम की कल्पना
अल्पदृष्ट हम क्या जाने?
ऽऽऽऽऽऽ
किन्तु सूक्ष्म है तुम्हरी दृष्टि
चहुं दिशी देखें और जाने
होकर भावविभोर हे साधक !
गा ले कवि की ऋचा
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

रहना लीन प्रभु-भक्ति में
नहला दे उसे भक्ति-रस से
ऽऽऽऽऽऽ
पूजा-पुष्प समर्पण-घृत से
हृदय हार अर्पित कर कर से
नहलाओ यदि भक्ति-रस से
आनन्द-रस लोगे पा
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो
काव्य मङ्गल तुम्हरा
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

हिम को पिघलाए सूर्य, सविता !
जिससे पाते जलधाराएँ
ऽऽऽऽऽऽ
आशुतोष प्रभु इसी तरह से
आनन्द-धारा से नहलाएँ
जैसे रवि ने प्रकाश बिखेरा
आत्मज्योति की अता
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

सोना, चाँदी, हीरे, मोती
धन चमकाता समदृत सविता
ऽऽऽऽऽऽ
वैसे भक्तों में चमकाता है
सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अहिंसा
क्यों ना पाए चमक प्रभु से
चन्द्र सी सोमप्रभा
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो

महादानी !! हे सविता! तुमसे
विनत प्रार्थना करते हैं
ऽऽऽऽऽऽ
दृत ऐश्वर्य ही पाएँ तुमसे
पा आल्हादक, संवरते हैं
चन्द्र सा आल्हादक धन पाकर
धन्य हों हे अनघा !


कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो
काव्य मङ्गल तुम्हरा
सहृद् हृदय-आल्हादक स्वामी
क्रान्तदर्शी प्रयता
कवियों में तुम श्रेष्ठ कवि हो