मेरे प्रियतम !! प्रभु !! जल्दी आओ
मेरे प्रियतम !! प्रभु !! जल्दी आओ
“दर्श” अपना मुझे अब दिखाओ (1)
मैं हूँ बालक निपट अज्ञानी
हे पिता ! आप हो पूर्ण ज्ञानी
पर्दा अज्ञान का अब हटाओ
दर्श अपना मुझे अब दिखाओ
भोग विषयों में जन्म गँवाया
पञ्च क्लेशों(2) ने मुझको सताया (2)
भक्त अपने को धीरज बंधाओ
दर्श अपना मुझे अब दिखाओ
भक्त वत्सल प्रभु तुम कहाते
देर इतनी हो फिर क्यों लगाते
अपनी भक्ति का अमृत पिलाओ
दर्श अपना मुझे अब दिखाओ
प्राण प्रिय अब नहीं देर करना
मोरे आँगन में आसन विचरना
धन्य कुटिया के भाग्य जगाओ
दर्श अपना मुझे अब दिखाओ
मन की दुर्भावना दूर करना
भ्रातृ भावों को हृदय में धरना
इस “चंचल” को चेरा बनाओ
दर्श अपना मुझे अब दिखाओ










